Posts

मैने हार कब मानी है

Image
     ऊर्जा का संचार करने के लिए कुछ पंक्तिया प्रस्तुत कर रहा हु शीर्षक है-                     "मैने हार कब मानी है" 1.माना घना अंधेरा है , दूर अभी सबेरा है। पग पग चलना है, इन दुखो से लड़ना है। यही तो जीवन की रवानी है, लेकिन मैंने हार कब मानी है। 2.समस्याओ ने घेरा है , डाला मुझ पर डेरा है। अंधेरो से तो मेरा पुराना नाता है, इन्हें मेरा घर कुछ ज्यादा ही भाता है। दुख सुख तो इस जीवन की कहानी है, लेकिन मैंने हार कब मानी है। 3. अपनो के ही चक्रव्यूह में घिर गया हूं, ये ना सोचो कि डर गया हूं। निकलना मुझे भी आता है, संघर्षो से तो मेरा पुराना नाता है। मेरे अंदर दौड़ रहा खून खानदानी है, मैने हार कब मानी है। 4.मुझसे ना कभी हो पायेगा ऐसा कभी मैने सोचा नही। लाख मुश्किलें आयी लेकिन मैं कभी हारा नही। आंधी तूफानो ने कब बरगद की जड़े उखाड़ी है। आज उनकी तो कल अपनी भी बारी है। अरे इन सबसे तो मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है, मैने हार कब मानी है। 5. जब कभी भी हालातो के सामने टिक ना पाओ। जब कभी भी परिस्थितियों...

चुनाव आ गए

Image
चुनाव पर मेरी व्यंग भरी रचना जरूर पढे, रचना का शीर्षक है                   "लगता है चुनाव आ गए" 1. जो कल तक हमे देखते नही थे, आज हमे देखकर मंद -मंद मुस्कुरा गए,आजकल हमारे भी बाजार में कुछ भाव आ गए , लगता है चुनाव आ गए। 2.जो अपने ही किये वादों से भागे फिरते थे, आज नयी  घोषणाओं के साथ फिर वही जनाब  आ गए। जो कल तक मंहगी गाड़ियों में फिरते थे, आज उनके भी पाँव आ गए , लगता है चुनाव आ गए। 3.जिनके चक्कर मे कल तक हम दफ्तर दफ्तर फिरते थे , आज हमारी घर की चौखट पर वो भी दबे पाँव आ गए औऱ कभी कभार ही अमा गरीब की थाली में भी पुलाव आ गए,लगता है चुनाव आ गए। 4.माँ दादी , भैया -भाभी ना जाने कितने रिश्तों से जोड़ा उन्होंने, जो हमे कल तक पहचानते नही थे, आज उनको हमारे साथ सारे रिश्ते याद आ गए, लगता है चुनाव आ गए। 5.कल तक हम भाई-भाई हुआ करते थे, आज वो हमको आपस मे ही लड़ा गए। मंदिर -मस्जिदों के मुद्दे उन्हें अचानक ही याद आ गए, लगता है चुनाव आ गए । 6.माना कि ये कल हमारे पास नही आएंगे, लेकिन हम भी अपना फर्ज जरूर निभाएंगे। मतदान करके हम अप...

अटल जी को नमन

Image
    अटल बिहारी वाजपेयी जी पर कुछ पंक्तिया लिखने की           कोशिश की कविता का शीर्षक है       "हर हिदुस्तानी के जेहन में तुम्हारा नाम अटल था, अटल          है और अटल रहेगा" 1.उनके जैसा ना था , ना है और ना रहेगा, इस दुनिया मे तुम्हारा नाम हमेशा रहेगा, इस देह रूप में तुम हमारे साथ  ना हुए तो क्या हुआ, तुम्हारे विचारो का शमा हमेशा बना रहेगा, हर हिदुस्तानी के जेहन में तुम्हारा नाम अटल था अटल है और अटल रहेगा। 2. गॉवो से भारत जोड़ो का नारा दिया तुमने, भारत को विकास की गतिशीलता पर लाकर खड़ा किया तुमने। तुम्हारी एक एक कविताओं से युवाओं में जन्मो जन्मो तक अदम्य साहस भरा रहेगा, हर हिदुस्तानी के जेहन में तुम्हारा नाम अटल था, अटल है और अटल रहेगा........... 3.जब उस कायर पाकिस्तान ने धमकी दी परमाणु हमले की, तुम्हारे दो टूक जवाब से ही उसने दोबारा ना हिम्मत की बोलने की। अगर हुआ परमाणु हमला तो माना आधा हिदुस्तान गवा दिया हमने, लेकिन कल सुबह इस धरती पर पाकिस्तान का नामोनिशान नही रहेगा। हर हिदुस्तानी के जेहन में...

"हे भारत माँ"

Image
                   एक सैनिक की भारत माँ से बात                        कविता का शीर्षक है "माँ ये  तेरा स्वभिमान ना मिटने देगे हम, इस पावन मिट्टी का मान ना घटने देगे हम।" 1. माँ तेरे बच्चे इस धरा पर खड़े है सीना तान के, हे किसमे हिम्मत जो आँख उठा लेगा भारत के सम्मान पे। बात अगर आयी लहू बहाने की तो लहू की नदियां तक बहा देगे हम, माँ ये स्वाभिमान ना मिटने देगे हम.......... 2. एक शीश के बदले अनेको शीश लाने का प्रण लेते है, माँ तेरे सैनिक बेटे खून का कतरा-कतरा न्योछावर कर देते है। घर की माँ का बेटा  ना आये तो गम नही, पत्नी का श्रृंगार न्योछावर हो जाये तो गम नही। भारत माँ तेरे श्रृंगार में कुछ ना कमी होने देंगे, माँ ये स्वाभिमान ना मिटने देगे हम............. 3.माँ तेरे टुकड़े करने का इन गद्दारो में दम नही, ये बुजदिल गरजने वाले बादल है इनके बरसने का कोई मौसम नही। भारत भूमि पर देखने की कोशिस की तो ये कभी ना देख पायेगे, अरे  जलती हुई राडो से इनकी आंखों की रोशनी...

"अब सुकून कहा"

Image
                          पंक्तियों का शीर्षक है                              "अब सुकूँ कहा" 1.सुबह से ही भागदौड़ करता हु मैं, बिना शाम के ही रातो को जी रहा हु मै, दुनिया तो बस इधर से उधर दौड़े जा रही है कभी यहा कभी वहा, अब सुकूँ कहा........ 2.माँ की गोद मे सिर रख कर ना जाने कब सोया था मै, ना जाने कब पिताजी को याद करके रोया था मै, अब तो बॉस की ही बातों में मिलाते जा रहा है हा में हा, अब सुकून कहा......... 3.दुनिया भी बहुत कुछ बटोर रही है कुछ ना ले जाने के लिए, मै भी उसका हिस्सा हु ना जाने किसलिए, अपनो से बात किये बिना बित गया एक अरसा , अब सुकून कहा......... 4. चौपालों पर बैठकर दोस्तो के साथ बाते करता था मैं, उन पलों को खुशियो से जीता था मै, उन चौपालों की शामो में बस जाता था पूरा जहाँ, अब सुकूँ कहा....... 5.पहले साधनों के अभाव में भी खुशी से जीते थे हम, बिन बिजली पंखे के भी सुकून से सोते थे हम,  अब तो मखमल के गद्दों पर भी वैसी नींद क...

"ना जाने क्या-क्या हो रहा है!"

Image
                             "ना जाने क्या क्या हो रहा है!" 1. गॉवो की संस्कृति जा रही है, शहर वाली गॉवो में बहुये बनकर आ रही है, गॉवो के बेटों को फिर शहर ले जा रही है, ये देखकर अकेला बूढ़ा बाप रो रहा है, ना जाने क्या- क्या हो रहा है...... 2. आज का इंसान मुह पर मीठा और अपने अंदर जहर घोल रहा है, चौपालों को मोबाइलों ने छीन लिया है, पास बैठा आदमी-आदमी से नही बोल रहा है, ना जाने क्या क्या हो रहा है........ 3.कोई मेहबूब की यादो में रो रहा है तो कोई मेहबूब के मिलने पर सर पिट रहा है,आजकल फूल पर फूल मेहबूब को बाटे जा रहे है, और अपने माँ बाप के प्यार को भूल रहा है, ना जाने क्या- क्या हो रहा है...... 4.पूंजीपति पेट कम करने के लिए दौड़ रहा है, गरीब पेट भरने के लिए  दौड़ रहा है, जो ये कहकर आये थे गरीबी हटाएंगे वो सत्ता में आते ही गरीबो को महंगाई के तराजू में तोल रहा है, ना जाने क्या- क्या हो रहा है...... ✍🏼मयंक शुक्ला✍🏼 8770988241, 9713044668

"कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो"

Image
                   "कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो" 1. वो मेरी बचपन की दोस्ती प्यारी, जिसमे ना होती थी गद्दारी। पल-पल झगड़ लेते थे हम, लेकिन अगले ही पल में एक साथ होते थे हम। एक बार ही सही फिर से मौका दो, कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो........ 2. वो दोस्तो के साथ घर -घर घूमने जाना, सुबह से शाम तक घर ना लौट के आना। लड़ाई होने पर घर रोते हुए आना,अब ना खेलूंगा इनके साथ ये बात माँ को बताना। मेरे बचपन वाली लड़ाई ही करवा दो, कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो....... 3.वो दोस्तो के साथ नदी पर नहाना, वही से क्रिकेट खेलने जाना। पापा के लौटने के पहले घर आना , और बेफिक्र हो जाना। यारो मुझे वो यादो की नदी में डूबा दो, कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो......... 4.शाम को मिलते ही दिनभर की बाते करना, चौपालों पर बैठकर एक दूसरे पर आरोप मढ़ना। आज इससे लड़ाई, कल उससे झगड़ा फिर अगले ही पल साथ हो जाना। बचपन की मासूमियत को लौटा दो, कोई मेरे बचपन के पल लौटा दो...... 5.आज के दौर में परिवर्तन तो हुआ है, उन चौपालों की बैठको को मोबाइल ने छिन लिया है। अब साथ रहकर भी आपस...