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"आप धीरे-धीरे मरने लगते हो"

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                    कुछ पंक्तिया शीर्षक है                "आप धीरे- धीरे मरने लगते हो" 1.जब आप किसी बच्चे के साथ बच्चा नही बन पाते हो,जब आप अपने मन की नही सुन पाते हो, जब आप अपने मन की सुनकर भी अनसुना सा कर देते हो तब आप धीरे -धीरे मरने लगते हो........................... 2.जब आप थक-हार के घर जाते हो,जब आप सुबह से शाम तक मुस्कुरा नही पाते हो,जब आप परेशानियों में उलझ से जाते हो तब आप धीरे- धीरे मरने लगते हो.............. 3. जब आप किसी परिस्थिति को जीत नही पाते हो,जब आप अपने मन से ही हार जाते हो,जब आप अपनी समस्या को खुद नही सुलझा पाते हो तब आप धीरे -धीरे मरने लगते हो ......... 4.जब आप सब कुछ छोड़कर पैसो के पीछे भागते हो,जब आप सबकुछ पाकर भी बहुत कुछ खो देते हो, जब आप छोटे-छोटे पलो का मजा नही ले पाते हो तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हो......... 5. जब आप किसी जरूरतमंद की मदद नही कर पाते हो,जब आप किसी के दुख का हिस्सा नही बन पाते हो, जब आप भीड़ में भी अकेला महसूस करते हो तब आप धीरे-धीरे मरने लगते ...

"जातिगत आरक्षण"

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              सामान्य वर्ग की व्यथा पर कुछ पंक्तिया मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए.. 1.मेरी माँ का सपना है बेटा सरकारी अफसर बने,पिता दिन-रात मेहनत करके उस सपने को बुने, मेरे मात-पिता के सपनो को यू ना जलाइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए.......... 2.पिता ने कर्ज लेकर पढ़ाया मुझको, इस आस में की बेटा एक दिन सुत समेत चुका देगा इसको, एक पिता की मेहनत को इस कदर ना बहाइये , मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए............ 3.बहन की आस हु मै, पिता का विश्वास हु मै, मेरे माँ के सपनो का साकार रूप हु मै, इतनो की आस को यू ना डुबाइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिए........... 4.जब बेटा डिग्री लेकर घर को जाता है, मात-पिता सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है,रोजगार की तलाश में अब यू ना भटकइये, मै भी सामान्य वर्ग का दलित हु साहब मुझे भी आरक्षण चाहिये... 5.जब कभी भी घर जाता हूं मैं, मात-पिता के सपनो को उनकी आंखों में देखकर कई दफा मर जाता हूं मैं,अब मुझे अपनी नजरो में ही ...

"नारी शक्ति"

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       "विश्व महिला दिवस " कुछ पंक्तिया शीर्षक है                   "हा एक नारी हु  मै" 1. हा एक नारी हु मै, औरो के सपनो पर जीती हु, घर के किसी कोने में रोती हु; बिलखती हु, लोगो की नजरों में बेचारी हु मै, हा एक नारी हु मै......... 2.अपमानों का घुट पीकर रह जाती हूं मैं, कभी दहेज के लिए , कभी सिरफिरे आशिक के लिए जला दी जाती हूं मैं, सम्मान की आस में अपना पूरा जीवन गुजारी हु मै, हा एक नारी हु मै......... 3.कभी कभी तो मुझे माँ की कोख मे ही मार दिया जाता हैं, मेरी नन्ही सी दुनिया को चंद महीनों में ही उजाड़ दिया जाता है, मत मारो माँ ये आवाज माँ की कोख मे से पुकारी हु मै, हा एक नारी हु मै..... 4.लोगो की मैली नजर को दिनभर ढोती हु मै, कभी कभी अपनो का ही शिकार होती हु मै, अपनो पर ही भरोसा नही कर पा रही हु मै , हा एक नारी हु मै........ 5.कभी दुर्गा ,लक्ष्मी , सरस्वती के रूप में पूजी जाती हु मै, कभी लोगो की हवस के लिए नोची जाती हु मै,अपनो के सम्मान में जिंदगी जीती जारही हु मै, हा एक नारी हु मै......... 6.काश मुझे भी सम...
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      होली के पावन पर्व पर कुछ पंक्तिया शीर्षक है              "कि आ सखी होली खेले" 1.कि आ सखी होली खेले,  कुछ रंग प्यार के, कुछ रंग दुलार के ,कुछ रंग एक दूसरे के साथ के एक दूसरे पे उड़ेले  कि आ सखी होली खेले। 2.नफरतो के रंग को, दुनिया के प्रपंचो को , अपने अंदर की बुराइयों को चल यही छोड़ चले , की आ सखी होली खेले.......... 3.हँसी, खुशी ,मुस्कुराहट के रंगों को एक दूसरे के संग में घोले, की आ सखी होली खेले.. ..... 4.इस अकेलेपन को, जीवन के नीरस रंग को ,इंद्रधनुष जैसे सतरंगी रंगों में रंगेले, की आ सखी होली खेले................... 5.संसार के झमेलों से , दुनिया के मेलो से चल कही दूर चले ,कि आ सखी होली खेले............ 6.नफरतो के रंग को,गलतफहमियों से पैदा हुए कड़वे संबंध को प्यार के रंगों में घोले ,कि आ सखी होली खेले........ 7.इछारूपी रंग ना कभी पूरा होने वाला है, इसलिए जहा है वही का मजा ले , इतने सारे रंगों को अपने जीवन मे उड़ेले कि आ सखी होली खेले............✍🏻 मयंक शुक्ला✍🏻

"रावण"

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रावण नाम सुनते ही हमारे मानसपटल दानव,दैत्य, राक्षस की छवि आ जाती है। लेकिन रावण क्या वाकई में वैसा इंसान था जैसा हम सोचते है,क्या वाकई में हम रावण का पुतला जलाने लायक है। रावण एक ऐसा किरदार जिसे बुराई का प्रतिक माना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए जलाया जाता है,लेकिन क्या रावण वाकई में इतने बुरे इंसान थे जितना आज का इंसान हुआ जा रहा है। रावण जी को प्रखण्ड पंडित कहा जाता था, हा उन्होंने सीता माता का अपरहण किया था लेकिन उन्होंने कभी माता सीता को जबरजस्ती छूने की कोशिस भी नहीं की, लेकिन आज का इंसान तो ना जाने क्या क्या कर रहा है? रावण जी ने तो अपने दशोशिश निकाल कर अपना किरदार बताया लेकिन आज के इंसान में न जाने कितने रावण(बुराई) छिपी हुई है। रावण जैसा भाई तो हर बहन को मिले जिसने अपनी बहन के लिए पूरे कुल और स्वयं को भी नष्ट कर लिया। अब में आपसे कुछ प्रश्न पूछना चाहता हु और उम्मीद करता हु आप सब अपने अंतर्मन से सोचेंगे, अगर रावण गलत है तो हर वो इंसान गलत है, जो किसी परायी स्त्री पर नजर रखता है,जो अपने भाई का अपमान करता है,जो अपने अहंकार में जीता है,जिसमे कोई ना कोई बुराई जरूर है क्य...

"हा मेरे देश में ही तो होता है"

1.कोई करोडो लेकर विदेश चला जाता है, गरीब किसान कर्ज में रोज फाँसी लगाता है।। हा मेरे देश में ही तो होता है...... 2. दहेज़ के नाम पर बेटियो को जलाया जाता है, देश की बेटियों का गर्भ में ही गला दबाया जाता है। हा मेरे देश में ही तो होता हैं......... 3.55 नंबर वाला अफसर बन जाता है, 80 नंबर वाला रोजगार तलाश में दर दर भटकता है। हा मेरे देश में ही तो होता है........ 4.गरीबो का नेता घोटाले पर घोटाले करता जाता है, फिर भी मेरे देश का आम इन्सान अच्छे दिन की आस लगाता है। हा मेरे देश में ही तो होता है......... 5.ना जाने कब कोई आदमी आम से खास बन जाता है, जिनका विरोध करके सत्ता में आया था उनसे ही हाथ मिलाता हैं। हा मेरे देश में ही तो होता है....... 6. वंशवाद की राजनीती को बढ़ा चढ़ाकर बताया जाता है, हमारे देश में विकास का पैमाना भी जाति के आधार पर नापा जाता है। हा मेरे देश में ही तो होता है....... 7.देश के खिलाफ बोलने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी बताया जाता है, एक आतंकवादी के लिए आधी रात तक कोर्ट चलाया जाता है। हा मेरे देश में ही तो होता है....... 8.फिर भी मेरा देश मुझे सबसे प्यारा लगता है,...

" थोड़ा मुस्कुराया जाये"

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1.चलो थोड़ा मुस्कुराया जाये, जिंदगी की परेशानियों को भुलाकर फिर से चेहरे को खिलखिलाया जाये। बहुत दिन हो गए है अपनों से बात किये हुए, चलो आज उनसे भी थोड़ी देर बतियाया जाये।। चलो थोड़ा मुस्कुराया जाये............ 2.पैसा ,तरक्की ,काम इनमे बहुत उलझे हुए है, अरे साहब इन्हें छोड़कर अपने लिए भी जिया जाये।। फख़त आरजू थी पहले चाँद छूने की,अब कुछ देर के लिए ही सही अपने चाँद को निहारा जाये।। चलो थोड़ा मुस्कुराया जाये......... 3.जिम्मेदारियों ने जकड़ रखा है जंजीरो से,कुछ देर के लिए ही सही इनसे भी पीछा छुड़ाया जाये।। अपने यारो, रिश्तेदारों पर बहुत गर्व है, बुरा वक़्त है चलो आज इन्हें भी आजमाया जाये।। चलो थोड़ा मुस्कुराया जाये......... 4.बड़े -बड़े पलो की तलाश में दौड़े जा रहे हो, चलो आज छोटे-छोटे पलो का भी मजा उठाया जाये।। जिंदगी एक खुशनुमा एहसास है, इस एहसास को हँसी ख़ुशी बिताया जाये।। चलो थोड़ा मुस्कुराया जाये........ 5.तेरा-मेरा, अपना-पराया,सच्चा-झुठा बहुत कर लिया, क्यों ना अब सबको अपना बनाया जाये।। ऐ जिंदगी तेरी जिम्मेदारिया निभाते-निभाते थक चुके, मुनासिब होगा अब अपना भी हिसाब कराया जाये।। चल...